महाभारत में जब रंगभूमि में कर्ण को सूत-पुत्र कहकर अपमानित किया जा रहा था, तब दुर्योधन ने उसे अंग देश का राजा बनाकर उसकी रक्षा की। दुर्योधन ने कर्ण में एक असाधारण योद्धा देखा जो अर्जुन को टक्कर दे सके, इसलिए यह कदम राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण था। कर्ण ने इस मित्रता को जीवनभर निभाया और अपनी मृत्यु तक दुर्योधन का साथ नहीं छोड़ा। महाभारत की यह कथा सिखाती है कि सच्ची मित्रता जाति, कुल और स्वार्थ से ऊपर होती है। #महाभारत #Mahabharat #कर्णऔरदुर्योधन #कर्ण #दुर्योधन #सच्चीदोस्ती #महाभ