← Back to Facebook

मार्कण्डेय ने मोक्ष क्यों ठुकराया? शिव भक्ति का सबसे बड़ा रहस्य

मार्कण्डेय ऋषि की मृत्यु मात्र सोलह वर्ष की आयु में निश्चित थी, लेकिन उन्होंने शिवलिंग को इतनी शक्ति से पकड़ा कि यमराज का पाश स्वयं शिव पर जा पड़ा — और शिव ने यमराज को रोककर मार्कण्डेय को अमरत्व का वरदान दिया। जब भगवान शिव ने मोक्ष का प्रस्ताव रखा, तो मार्कण्डेय ने कहा: "मुझे मोक्ष नहीं, बस आपकी भक्ति चाहिए।" हिंदू दर्शन में भक्ति को मोक्ष से भी ऊपर माना जाता है, क्योंकि मोक्ष में ईश्वर से प्रेम का संबंध समाप्त हो जाता है। मार्कण्डेय आज भी सप्तचिरंजीवियों में गिने जाते हैं — वे अमर भी हैं और भक्त भी। #शिव #हिंदूधर्म #मार्कण्डेय #शिवभक्ति #मोक्ष #हिंदूदर्शन #सप्तचिरंजीवी #मृत्युंजय

##शिव ##हिंदूधर्म ##मार्कण्डेय ##शिवभक्ति ##मोक्ष ##हिंदूदर्शन ##सप्तचिरंजीवी ##मृत्युंजय