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भीष्म की इच्छा मृत्यु — वरदान था या सबसे बड़ा श्राप? | Mahabharat

महाभारत में भीष्म पितामह एकमात्र ऐसे योद्धा थे जिन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था — अर्थात वे अपनी इच्छा से मृत्यु का समय स्वयं चुन सकते थे। यह वरदान उन्हें उनके पिता राजा शांतनु ने उनकी भीष्म प्रतिज्ञा — सिंहासन और विवाह दोनों के त्याग — से प्रसन्न होकर दिया था। कुरुक्षेत्र युद्ध में अर्जुन के बाणों से घायल होने के बाद भी भीष्म ने शरीर नहीं त्यागा, बल्कि सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की। यह कथा इस गहरे प्रश्न को जन्म देती है कि जो शक्ति मृत्यु को भी रोक सके, क्या वह सदा वरदान होती है या कभी-कभी सबसे बड़ी परीक्षा बन जाती है? #mahabharat #mythology #भीष्मपितामह #इच्छामृत्यु #bhishmpitamah #kurukshetra #महाभारत #hindumythology #bhishmpratigya #उत्तरायण

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