कुरुक्षेत्र युद्ध से पहले श्रीकृष्ण ने कर्ण से एकांत में भेंट की और उन्हें बताया कि वे कुंती के ज्येष्ठ पुत्र और पांडवों के बड़े भाई हैं। कृष्ण ने कर्ण को पांडव पक्ष में आने पर सबसे बड़े राजा का दर्जा और द्रौपदी से विवाह का प्रस्ताव दिया, किंतु कर्ण ने दुर्योधन की मित्रता को राजपाट से ऊपर रखते हुए यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। कर्ण ने केवल यह वचन माँगा कि युद्ध के बाद कुंती के पाँच पुत्र जीवित रहेंगे — यही वो ऐतिहासिक निर्णय था जिसने महाभारत का भाग्य सदा के लिए निर्धारित कर दिया। #महाभारत