महादेव ने हलाहल विष क्यों पिया? | नीलकंठ की कथा | समुद्र मंथन
क्या आप जानते हैं… महादेव ने हलाहल विष क्यों पिया था? एक समय देवताओं ने अपना तेज और शक्ति खो दी। तब भगवान विष्णु ने उन्हें क्षीर सागर का मंथन कर अमृत प्राप्त करने का उपाय बताया। लेकिन समुद्र मंथन अकेले संभव नहीं था। इसलिए देवताओं और असुरों ने मिलकर मंथन करने का निर्णय लिया। मंदार पर्वत बना मथनी… और वासुकी नाग बना रस्सी। समुद्र मथा जाने लगा। एक के बाद एक दिव्य रत्न बाहर आने लगे। लेकिन अमृत से पहले निकला— भयंकर हलाहल विष। उसकी विषैली ज्वाला से तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। देवता और असुर भी उसे रोक नहीं सके। सृष्टि के विनाश का संकट सामने था। तब सभी महादेव की शरण में पहुँचे। महादेव ने देखा— अगर यह विष फैल गया, तो निर्दोष सृष्टि नष्ट हो जाएगी। उन्होंने बिना अपने बारे में सोचे हलाहल विष स्वयं पी लिया। माता पार्वती ने विष को उनके कंठ से नीचे जाने से रोक दिया। विष वहीं ठहर गया… और महादेव का कंठ नीला हो गया। तभी से वे कहलाए— नीलकंठ। लेकिन महादेव ने विष क्यों पिया? क्योंकि उन्होंने अपनी पीड़ा से पहले सृष्टि की पीड़ा को देखा। यही महादेव की करुणा है— दूसरों को बचाने के लिए स्वयं विष सह लेना। हर हर महादेव। #महादेव #शिव #नीलकंठ #समुद्रमंथन #हलाहलविष #भोलेनाथ #पौराणिककथा #शिवकथा #हरहरमहादेव महादेव शिव नीलकंठ समुद्रमंथन हलाहलविष भोलेनाथ पौराणिककथा शिवकथा हरहरमहादेव
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