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मृत्यु का भय कैसे समाप्त होता है? | नचिकेता और यमराज | Part 11

कठोपनिषद के अनुसार, मनुष्य मृत्यु से इसलिए डरता है क्योंकि वह शरीर को ही अपना संपूर्ण अस्तित्व मान लेता है। यमराज ने नचिकेता को सिखाया कि आत्मा का वास्तविक स्वरूप शरीर से परे है और उसे न जन्म है, न मृत्यु। जब मनुष्य जीवन की अनित्यता को स्वीकार करता है, तो वह मृत्यु के भय को समझने का साहस जुटा सकता है। नचिकेता की जिज्ञासा उसे सामान्य प्रश्नों से आगे ले गई और यही उसकी ज्ञान-यात्रा की सबसे बड़ी शक्ति थी। #कठोपनिषद #आत्मज्ञान #मृत्युकाभय #नचिकेता #यमराज #वेदांत #अध्यात्म #मृत्युरहस्य #नचिकेताऔरयमराज

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